Thursday, June 7, 2007
मोहब्बत का बस...
मोह्बत बस इतना फ़साना है , कागज की हवेली है , बारिश का जमाना है, क्या शर्ते ज़माना है। आवाज़ भी जख्मी है, और गीत भी गाना है। उस पार उतरने की उम्मीद बहुत कम है, कश्ती भी पुरानी है, तूफान का भी आना है। समझे या ना समझे वो, अंदाज मोहब्बत के, एक शख्स को आँखों से एक शेर सुनाना है। भोली सी अदा, कोई सिर्फ इश्क की जिद पर है, ये आग का दरिया है और डूब के जाना है।
Monday, June 4, 2007
Friday, May 25, 2007
Subscribe to:
Posts (Atom)